14 फ़रवरी 2014

बिखरे प्यार तमाम



तुम हंसी
भौरो का 
अन्तर्मन हंसा
याद आई साँझ की 
स्पर्श माला
तुम मुस्कुरायीं
कलियों खिलीं
फूलों की पंखुड़िया
कहीं पलकों पर 
फिर से आ गिरीं
सुर्ख होंठों ने कहा
कौन हो तुम
प्यार के 
अद्भुत सफर मे
मौन हो
आज तो सारा जहां
मदहोश है
प्यार की आशा पर बस
खामोश है
चाद तारे 
जमीन पर बिखरे पड़े है
फूल, सूरज, नयन , गेशू
सब डरे हैं
आओ बढ़कर
गोधुली का अब
मौन तोड़ो
अपभ्रंश होते शब्द का अब 
मोह छोड़ो
मीरा बनो
राधा बनो
बनो कृष्ण और राम
वैलेंटाइन शब्द के बदले
बिखरे प्यार तमाम

-कुशवंश'


हिंदी में