22 जनवरी 2013

काश ! हम जी रहे होते....



काश ! हम जी रहे होते
सबके आंशू, पी रहे होते
गूंजती, देखते गर, हवाओं में चीखें
कुछ रिश्ते पिरो रहे होते
बात होती रही , सदियों से, संस्कारों की
बिखरते रिश्तों की ,
कुत्सित विकारों की,
राम-राज्य की यादें संजो रहे होते
काश हम जी रहे होते ....
खोज लेते कोई गृह, नया आसमा
नयी पृथ्वी संजो रहे होते
काश ! हम जी रहे होते ...
मिल ही जाती कोई और
चाँद सी पृथ्वी
सीप से मोती...
सागर के तह में जो गए होते
काश हम जी गए होते ....

हिंदी में