30 जून 2012

रास्ते कब कहाँ ... आसान होते हैं











रास्ते कब 
कहाँ 
आसान होते हैं
भरे पड़े है जंगल 
कंक्रीटों के 
मगर सब फूस के मकान होते हैं 

पटी पडी हैं गलियां भी 
सड़कें भी , कंकडों से 
किसके तलुए हैं 
जो 
लहुलुहान होते हैं 

दिल में 
जितनी भी  
बिछी हो 
मखमली यांदें 
हसीं सपनों का  
बहकता सावन 
कोयल सा उड़ता 
तरंगित मन 
तैरते संगीत में सब 
भैरवी तान होते है 
रास्ते कब कहाँ 
आसान होते है 

-कुशवंश 



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