16 नवंबर 2011

हम दिल की कभी नहीं मानते .


कभी खामोश होकर
चुपचाप
बिना कोई आवाज़ किये
करके बंद आँख  
दिल ने जो कहा सुना है क्या ?
दिल कभी भी
गलत रास्ता नहीं दिखता
चलते हुए गलत रास्तों पर बार-बार
न चलने देने के
गति अवरोधक लगाता है
मगर ये कौन है जो
दिल की बात नहीं मानता
और  वही करता है जो
पापी मन कहता है 
कोई और तो नहीं
न ही तुम्हारी परछाई
फिर उपदेश क्यों ?
और किसके लिए  
शब्दों में पिरोये हुए उपदेश
मस्तिस्क में उपजते है
और
वाचाल मुख से
दूसरों के लिए निकल लेते है
दिल जानता है
उन उपदेशों की हकीकत
इसीलिये दिल से बच कर निकल भागते है
दूसरों को पाठ पढ़ाने
क्योंकी
उन्हें मालूम है
मुस्कुराता हुआ दिल उन्हें
गलत साबित कर देगा
पल भर में
और दिल की मान कर वो
किसी को बरगला  नहीं पायेगा
और जब तक ये मन
सच का झूठ नहीं बनाएगा
बेमौत मारा जायेगा
सीधे स्वर्ग में जायेगा
और स्वर्ग में वो कैसे रहेगा
सच और सिर्फ सच के साथ
झूठ और सपनों के आगोश में पला बढ़ा मन  
इसी लिए दिल की नहीं सुनता
मन ही क्यों कोई भी
दिल की नहीं सुनता
दिल की सुनेगा तो इस प्रगति में
कही पीछे छूट जायेगा
बहुत पीछे रह जायेगा.
अब हमें प्रगति तो करनी ही है
भले ही वो झूठ के घरौंदे पर हो
तो दिल को कैद करने में ही भलाई है
इसी लिए हम दिल की
कभी  नहीं मानते .

-कुश्वंश

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