20 नवंबर 2011

जागो समय नहीं रुकता है











जागो समय नहीं रुकता है
पीछे जग मातम करता है
सबका कल पीछा करता है 
जागो समय नहीं रुकता है ...  
धीरे धीरे रेत सरकती
मुट्ठी, खाली खाली रहती 
रुक जाते  पर,  उड़ते उड़ते
मुह के बल पक्षी गिरता है
जागो समय नहीं रुकता है ....
वर्षों से जो सपने पाले
तपन, थकन से पड़ गए छाले
अनवरत रक्त , स्वेद  रिसता है
जागो समय नहीं रुकता है ....
मेहनत का हक उनसे मांगो
कर्त्तव्य  मार्ग पर पहले जागो
फिर जुटकर हुंकार भरो
चुप रहने से जग हंसता है
जागो समय नहीं रुकता है ....
आयेंगे कुछ छलने  वाले
चुपड़ी बाते करने वाले
सदियों से बाते सुन सुन कर
किसका पेट कहा भरता है
जागो समय नहीं रुकता है ...
चूक गए तो सोते रहना
हक की बात कभी मत कहना
समय मिला है इसे भुनाओ
अपने मन की बात गिनाओ 
गाल बजाते रहे अभी तक
माटी मोल देश बिकता है 
जागो समय नहीं रुकता है .. 
कुछ अपने कर्त्तव्य निबाहो
देश  प्रेम की अलख जगाओ
खुला गेट और सोता मालिक
ऐसे घर  कुत्ता घुसता है
जागो समय नहीं रुकता है ..

-कुश्वंश






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