30 दिसंबर 2013

आओ नव वर्ष ...... तुम्हारा स्वागत



नया वर्ष
नए ख्वाब
नई संभावनाएं
उन्माद मे डूबी हुयी
चारो दिशाएँ
सिसकता रहा दिग्भ्रमित बीता वर्ष
याद करता रहा
जीवन के संघर्ष
सपनों मे भी याद नहीं कुछ
कैसा था
जाग कर भी उनींदा सा या
कुछ कुछ भीगा सा
श्वेद की बूंदें
चुहचुहाती  रहीं लालट पर
रस्क करता रहा
उनके ठाट पर
न जाने कब सारे बीत गए
महीने ही नहीं दिन भी सारे रीत गए
टूटी कमर
दोहरी रीढ़
केचुल उतार गई
जो अभी तक साथ थी वो घर गई
मुहाने पर आ गया  फिर नया वर्ष
क्या कहूँ
किससे कहूँ
जीवन विमर्स
आओ पुनः नव वर्ष
तुम्हारा स्वागत
बस तुम्हारा स्वागत.......

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