1 नवंबर 2013

दिये जलाओ कि..


दिये जलाओ 
कि कोई तिमिर हटे 
दिल मिलाओ 
कि कोई प्यार बटे
जुगनुओं सी रोशनी भी
यहा है काफी
अंधेरा भगाओ कि
कोई धुंध छटे
टिमटिमाती रोशनी में
नहा गया है घर
खरीददारी से बहुत
बेतरतीब
भर गया है घर
स्नेह की कुछ जगह बनाओ
तो कुछ' बात बने
दिये जलाओ कि
कुछ तिमिर हटे 
हमने सदियों से उठा रखे है
परंपरा के पुस्प
उन्हे ताजगी सा महकाओ
तो कोई राग चले
दिये जलाओ कि कुछ
तिमिर हटे
.....

दीपावली कि शुभ कामनाएँ ..
      -कुशवंश

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