25 जुलाई 2013

निरअर्थ




कभी हवाओं  से मार देते हो
कभी घटाओं  से मार देते हो
जब भी चलता नहीं बस… कोई 
कातिल
अदाओं  से मार देते हो…
मर मर के ही
जीने का
कहाँ अर्थ है कोई
घूँट घूँट आंशुओं को ही
पीने का
विकल्प है कोई
चीखने चिल्लाने का
कहाँ रहा है
कोई अर्थ
तुम तो कभी-कभी
निरअर्थ मार देते  हो …।



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