22 दिसंबर 2012

मुझे जन्म चाहिए ?

तुम्ही बताओ
क्या किसी को यहाँ जन्म लेना चाहिए
दरिंदों की जमीन पर
असुरक्षित हवाओं में
घर की चाहार्द्वारी में कैद
मुझे
और कितना इंतज़ार करना चाहिए
माँ के सूख गए आंशू
सुन्न हाथ पैर लिए
बिस्तर  पर बीस साल से पड़े पिता के
दर्द को और कितना
इंतज़ार करना चाहिए
सड़क से अस्पताल
अस्पताल से कोर्ट और
फिर छत  को निहारती सूनी आँखे
मुझे कब तक
मरने का इंतज़ार करना चाहिए
तुम्ही बताओ
अब भी कहोगे तुम मुझे
यहाँ जन्म लेना चाहिए
तुम मोमबत्तियां जलाकर
मानव श्रखला बनाकर
सूरज डूबते ही
घर चले जाओगे
मैं अपने जन्म पर
सिसकती रहूँगी
किसके  पास है  इसका
वैधानिक इलाज़ , शायद नहीं
हमारे अन्दर छिपे
वीभत्स दरिन्दे का इलाज़ तो
हमारे अन्दर ही है न
अब आप उसे समझना ही न चाहें
समझ कर भी
अनजान रहें
तो कल फिर मैं
फेंक दी जाऊंगी  किसी सड़क पर
और तुम
शोर मचाते रहना
शहर दर शहर .


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