4 नवंबर 2012

हम जी गये होते…





कितने आंसू पी गये होते
काश: हम जी गये होते
तुम्हारा अहसास तुम्हारी परछाइयां
तुम्हारा आगोश तुम्हारी रुश्वाइयां
कितने मोती पिरो गये होते
काश: हम जी गये होते
जाते जाते कुछ पीछे मुड्ते
साथ जीते कुछ साथ में मरते
कुछ तुम भी जहर पी गये होते
काश: हम जी गये होते
चीखें थी आंशू थे खमोशियां थीं
सब जीते जी समझ गये होते
काश: हम जी गये होते
शाम है, शून्य है और डूबता सूरज
कुछ मूल्य समझ गये होते
काश: हम जी गये होते

-कुश्वंश

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