31 अगस्त 2012

हमारी अभिव्यक्तियाँ












मन का मंथन 
कानों को छूती
झकझोरती 
पुरवा हवा 
आभासी स्याही ,कलम और 
स्क्रीनी पन्नें पर उभरे 
कुछ शब्द 
स्वप्नीली आँखों से ढलके
सुर्ख अश्रुबिंदु 
अनहोनी सिहरन से 
उत्थित रोये 
या फिर 
दोनों होंठ मिलकर बनायें जो 
मोनालिसाई मुस्कान 
किसी सुखद  होनी के इंतज़ार में 
बंद आँखों की बोझिल पलकें 
किसी कदम्ब के इर्द गिर्द 
अठखेलिया करते 
पेम-रस भूंखे  प्रश्न 
और उन प्रश्नों में 
कुछ और प्रश्न भरते 
निरुत्तरित उद्धव 
गोपियों में न जाने कौन सी 
आस जागते 
द्वारिका गए कृष्ण 
बताओ 
इसके सिवा और कौन से तरीकों से 
व्यक्त होती है 
हमारी अभिव्यक्तियाँ  

-कुश्वंश 

7 टिप्‍पणियां:

  1. गोपियों में न जाने कौन सी
    आस जागते
    द्वारिका गए कृष्ण
    बताओ
    इसके सिवा और कौन से तरीकों से
    व्यक्त होती है
    हमारी अभिव्यक्तियाँ
    sunder
    uttam bhav
    rachana

    उत्तर देंहटाएं
  2. अनहोनी सिहरन से
    उत्थित रोये
    या फिर
    दोनों होंठ मिलकर बनायें जो
    मोनालिसाई मुस्कान

    वाह !!!!! अद्भुत.....

    उत्तर देंहटाएं
  3. नदी में बारिश की बूंदें गिरें... वैसा ही सौन्दर्य भाव है इस रचना में

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर और अद्दभुत रचना....
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  6. निरुत्तरित उद्धव
    गोपियों में न जाने कौन सी
    आस जागते
    द्वारिका गए कृष्ण
    बताओ
    इसके सिवा और कौन से तरीकों से
    व्यक्त होती है
    हमारी अभिव्यक्तियाँ

    वाह ! खुबसूरत !!!

    उत्तर देंहटाएं

आपके आने का धन्यवाद.आपके बेबाक उदगार कलम को शक्ति प्रदान करेंगे.
-कुश्वंश

हिंदी में