2 अगस्त 2012

बंधन..... ऐसे ही होते है .


बंधन
कुछ 
ऐसे  होते हैं 
साथ जुडें तो 
बने हिमालय 
टूटें तो 
सदियों रोते है 
बंधन बस 
ऐसे होते हैं 
पक्के हों 
या 
निर्मल  कच्चे 
धवल दुग्ध से 
मोती सच्चे 
शिशु से पालित 
स्नेह तिरोहित 
गहरी जड़े 
जमीन बोते है 
रिश्ते बस ऐसे होते है 
वृक्ष
नदी 
पहाड़ 
और झरने 
ऋतुये, 
जीव-जंतु 
भूमंडल 
रिश्ते स्वांश-स्वांश होते है 
बंधन 
ऐसे ही होते है .

-कुश्वंश  






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