24 अक्तूबर 2011

दीवाली के दिए



दीवाली के दिए
जलो निरंतर
जलना होगा
मन में तन में 
नीरव वन में 
टिम-टिम  करते जलो 
फकत तुम्हें बस
जलना होगा 
फ़ैल रहा है बस तम ही तम 
भ्रमित हुआ है  निर्मल मन 
डरते मन में  चमक  बिखेर कर जलना होगा
दिवाली के दिए 
निरंतर जलना होगा
पत्ती पत्ती  डाली डाली 
धूमिल है फूलों  की लाली
इन्द्रधनुष के रंग हुए बेरंग
रौशनी हो गयी  काली
कण कण में 
अंतर अंतर  में 
पुनः  रोशनी भरना होगा 
दीवाली के दिए
निरंतर जलना होगा
गली, चौबारे, महल, अटारी 
फूश झोपड़ी रहे न काली  
उजली उजली  चमक बिखेर बस  जलना होगा  
दीवाली के दिए  
तुम्हे बस
जलना होगा  
जलना होगा  .

-कुश्वंश 

(सभी सहृदय जनों एवं ब्लॉगर मित्रों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये  -कुश्वंश )
 

हिंदी में