17 अक्तूबर 2011

खुला आसमान ......





गमले में
एक पेड़ में मात्र तीन पत्ते
फूल एक भी नहीं
गुच्छों में फूल देख कर लाया  था  उसे
तीन साल से ऐसा ही है
एकदम मरियल
खाद भी समय से 
पानी भी भरपूर
मगर फूल एक भी नहीं 
एक दिन उसे उखाड़ना ही था
उखाड़कर बाहर क्यारी में फेंक दिया
और गमले में गुलाब ने जगह ले ली
अंग्रेजी गुलाब  में पीला फूल
जब झडा तो दूसरा नहीं उगा
अंतराल में  वो गुलाब भी सूख गया
लगभग साल भर बीते 
क्यारी में एक अजीब सा पेड़ 
पत्तियों से  भरा हुआ जंगली सा 
सोचा उखाड़कर फेंक दू 
सोचा चलो हरयाली दे रहा है
यूं ही छोड़ देता हूँ बिना उखाड़े
समय बीता
पेड़ रेंगते हुए खड़ा हो रहा था
फुनगियों पर गुच्ची भर पीले फूल थे
मुझे याद आ गया वो मरियल सा पेड़
गमले में जिसे
तीसरी पत्ती नसीब नहीं थी   
दिन प्रतिदिन मर रहा था  वो 
मर ही गया था लगभग 
उखाड़कर खुले में पहुचा
उसे मिली  
अपनी जमीन
अपना आसमान
गहरे तक जमा ली उसने जड़ें
खुशियों की पत्तियां फैला ली पंखों की तरह
पीले पीले फूल  
बिखेर दिए आने जाने वालों के सर पर  
पेड़ की खुशी देखते ही बनती थी   
उसने  धन्यवाद भी दिया उसको 
जिसने गमले से उखाड़कर 
जड़ें प्रदान की 
और  प्रदान किया विस्तृत आकाश 
समेटने के लिए 
कौन रहना चाहता है  
एक संकुचित गमले में 
जबकि प्रकृति का खुला आसमान  
सबके लिए है .

-कुश्वंश  

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