9 अक्तूबर 2011

नारी आज भी कमजोर ...?



नारी आज भी कमजोर और पराधीन  
क्यों ?
प्रश्न नारी की अस्मिता का नहीं   
अबला घोषित करने का है 
अपना जेहन टटोलो 
और इस झूठ को   
समझने ही कोशिश करो 
समझ जाओ तो 
जानने  की कोशिश करो
क्यों ?
कोख से शुरू होकर 
स्तन-पान  और  
कंधे से चिपक कर 
अगूठा चूसने की प्रक्रिया तक
किसी नारी को पुरुष की आवश्यकता नहीं  
पुरुष को  होती है
और फिर सौंदर्य की अठखेलियों से  
वंश चलाने की पौराणिक  प्रक्रिया तक  
विस्वास  की पराकाष्ठा के बीच 
पुरुष ने नारी   से ही तो चाहा है 
सब कुछ 
देने के नाम पर 
दिया क्या है  
अकेली राह में मिल जाने पर 
कार में खीच  
बलात्कार 
और लावारिस  फेकने की  परिणति
पैसे की भूख में 
केरोसीन से  धधकता जिस्म 
या फिर  
तंदूर में पके टुकड़े  
सब कुछ अबला बनाने के ही तो निशाँ हैं 
अबला  कहो
प्रयोग करो 
इज्ज़त और समाज के नाम  पर 
जिस्म पर  शोध करो 
मगर उठ खडी हुयी स्त्री
अब बिलकुल प्रयोग के लिए तैयार नहीं
अब जिसे जरूरत हो वो
हमारे कदम से कदम मिलाये 
वो न अब  जलेगी
न तंदूर में पकेगी और  न ही 
बलात्कार पर  रुशवा होगी
शायद बदलने की आहट
सुनायी दे रही हो तुम्हें
अगर नहीं तो 
किसी भ्रम में जी रहे हो तुम 
उससे बाहर निकलो 
और आस पास परवर्तित हो गयी हवाओं को पहचानो 
तुम्हे अपनी मांद
दिखने लगे शायद 
और जो हवाओं के साथ लय  में हो 
उनके संगीत की झंकार
सुनें भी
महसूस भी करे.

-कुश्वंश


    

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