1 अक्तूबर 2011

बापू तुम्हे प्रणाम ..





बापू ...!
तुमने तो कहा था 
देश आज़ाद होगा 
हम आज़ाद होंगे 
राम राज्य आएगा 
तुम्हारी लंगोटी और स्वराज्य का अर्थ 
समझा जाएगा 
तुम्हारी लाठी 
सहारा बनेगी 
तुम्हारी घड़ी 
समय का मूल्य और  अर्थ बताएगी 
दलितों के प्रति तुम्हारी संवेदना 
वास्तविक आकार लेगी 
वैमनस्यता की जमी धुल पोंछेगी
वोटों का सरकारी  बैंक  नहीं बन जायेगी 
बकरी के घावों पर 
मिट्टी थोपने की 
तुम्हारी संवेदना 
कुछ तो अर्थ लेगी 
मगर आज़ाद होते ही 
निर्मूल्य हो गए तुम्हारे सन्दर्भ 
तुम्हारे रामराज्य के अर्थ 
लोग कहते है 
गोडसे बहुत दिनों से  अपनी गोली 
धो-पोंछ  रहा था 
आपके कहने पर 
क्योंकी आप कैसे देख सकते थे 
अपने राम राज्य की ह्त्या 
जीते जी 
नग्न आँखों से 
अपनों के ही हांथों 
गोडसे की गोली से आज़ाद हो कर 
बच गए तुम 
अपने राम राज्य की अर्थी को 
सार्वजनिक कंधा देने से 
बापू ..! 
नेपथ्य से  तुम्हारी विद्रूप्त हंसी  
किसी को तीर सी नहीं लगती
किसी को शर्मिन्दा नहीं करती 
काहे की शर्म..! 
मना तो रहे है तुम्हारा जन्म दिन 
सारा दिन
तुम्हारी समाधी पर  गायेंगे 
तुम्हारे भजन 
चीख-चीख कर करेंगे सार्वजनिक  उद्घोस्ना 
भरी सभा को समझायेंगे 
तुम्हारे आदर्श  
बकरी के घाव
दलित चेतना  का मर्म  
राम राज्य का शाब्दिक अर्थ 
तुम्हारी टोपी का वाद 
फिर झाड पोंछ कर बाहर लायेगे ...
हम फिर तुम्हारा 
जन्मदिन मनायेगे .. 
बापू अपनी समाधी पर मिलना जरूर 
हम आयेंगे ..
तुम्हारा जन्मदिन मनाने. 

-कुश्वंश 

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