6 सितंबर 2011

अंतर्द्वंद




मेरे सपने 
कभी घेरते है मुझे 
खुली आँखों से 
और मैं अंतर नहीं कर पाता
सच की सीमा रेखा 
और असत्य के प्रलोभन में 
कौन है जो मुझे
अंधेरों में ले जायेगा 
और
प्रफुल्लित होने की प्रक्रिया समझाकर 
रोना सिखाएगा 
कही दूर तक 
बंधे होंगे वक्त के हाँथ 
कीलों से जड़े
फिर खड़े  होंगे ईशा मशीह 
कर्ण के बचाव में 
रथ के पहिये  नहीं आयेंगे काम 
कानिस्ट के हांथों 
धर्माधिकारी की सह पर 
प्राण गवाने को मजबूर
नाजायज कर्ण
सदियों तक रहेगा अपमानित
विभीषण बताएँगे
रावन को संघारने का मंत्र
और राज्यभिशेख की सीढियां जा चढ़ेंगे
सुग्रीव छल से
बाली को छलेंगे, और
राज्य को अपने नाम करेंगे
भगवान् बुध्ध को नहीं होगी ममता
राहुल की
विश्व भर में  इतने धर्मावलम्बी
उन्हें भगवान् तो बना ही देंगे
सत्य , सिर्फ  होता है सत्य
उसे समझने को
सपने नहीं देखने  होते
और  खुली आँखों से
सपने नहीं देखे जाते
और ना ही
अवतार  को किसी अवसर की तलाश होती है
वो तो ले लेता है जन्म
हमारी आपकी शक्ल में
अब ये तुम हो जो
समझने में भूल कर जाओ ...
उसे पहचान ही ना पाओ ......................?

-कुश्वंश



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