28 अगस्त 2011

जाग रहा है देश




जाग रहा है देश 
अभी तक 
नहीं मरा है
एक नए गांधी के पीछे 
युवा खड़ा है
समझ रहे हो ....
तनी मुट्ठियों की परिभाषा 
जान गए हो....
युवा शक्ति की व्यापक भाषा 
दिल्ली से कश्मीर 
वहाँ से कन्याकुमारी 
सुलग रही है आग 
हुआ है  सीना भारी 
एक  नए भारत की मन में
फिर तस्वीर बसाकर 
जन गन मन में 
फिर आशा की ज्योति  जगाकर 
प्रजा शक्ति से
जन प्रतिनिधि की भाषा बदली 
सांसदों ने भी मशाल  की 
आंच परख ली 
रुको नहीं अब 
अभी दूर तक चलना होगा 
बुझे नहीं  चिंगारी 
तुम्हे समझना होगा
आधी जीत , अधूरे सपने 
रहे अधूरे अगर थके तुम 
झंडे लेकर चलते रहना 
रुके न अब जो बढे कदम 
जाने  विश्व ,
परख ले दुनियां 
बिना रक्त के संभव क्रांति 
भारतवर्ष अग्रणी हरदम 
जन आन्दोलन, 
अद्भुत शांति.

-कुश्वंश 






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