महेश कुशवंश

28 अगस्त 2011

जाग रहा है देश




जाग रहा है देश 
अभी तक 
नहीं मरा है
एक नए गांधी के पीछे 
युवा खड़ा है
समझ रहे हो ....
तनी मुट्ठियों की परिभाषा 
जान गए हो....
युवा शक्ति की व्यापक भाषा 
दिल्ली से कश्मीर 
वहाँ से कन्याकुमारी 
सुलग रही है आग 
हुआ है  सीना भारी 
एक  नए भारत की मन में
फिर तस्वीर बसाकर 
जन गन मन में 
फिर आशा की ज्योति  जगाकर 
प्रजा शक्ति से
जन प्रतिनिधि की भाषा बदली 
सांसदों ने भी मशाल  की 
आंच परख ली 
रुको नहीं अब 
अभी दूर तक चलना होगा 
बुझे नहीं  चिंगारी 
तुम्हे समझना होगा
आधी जीत , अधूरे सपने 
रहे अधूरे अगर थके तुम 
झंडे लेकर चलते रहना 
रुके न अब जो बढे कदम 
जाने  विश्व ,
परख ले दुनियां 
बिना रक्त के संभव क्रांति 
भारतवर्ष अग्रणी हरदम 
जन आन्दोलन, 
अद्भुत शांति.

-कुश्वंश 






29 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर सामयिक प्रस्तुति ।

    बेशक यह तो शुरुआत है । लड़ाई अभी लम्बी है ।
    देश को शुभकामनायें ।

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  2. रुको नहीं अब
    अभी दूर तक चलना होगा
    बुझे नहीं चिंगारी
    तुम्हे समझना होगा

    आधा रास्ता तय हुआ है, बाकी को भी पूरा करना है।
    यह चिंगारी न बुझे, यही कामना है।

    प्रेरक रचना के लिए बधाई।

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  3. सुन्दर सन्देश देती हुई प्रेरक रचना के लिए आपको बधाई.

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  4. जाने विश्व ,
    परख ले दुनियां
    बिना रक्त के संभव क्रांति
    भारतवर्ष अग्रणी हरदम
    जन आन्दोलन,
    अद्भुत शांति.

    सुन्दर, सार्थक रचना...
    सादर बधाई...

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  5. कहते हैं न अभी तो ये अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है... जीत अभी अधूरी है, इसे पूरा करना ही होगा...सन्देश देती हुई प्रेरक रचना के लिए आपका बहुत बहुत आभार...

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  6. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 29-08-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  7. प्रेरक संदेश देती सुन्दर रचना।

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  8. जिस क्रान्ति से अत्याचारियों को कतई भय न हो... वह क्रान्ति हमेशा छली जाती है.
    जिस तलवार में धार न हो वह केवल बालकों को डराने के काम आ सकती है... उस तलवार से अनुभवी शैतानों से लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती.
    ...... एक बात सोचिये कि कभी कोई शराबी ... शराबबंदी आन्दोलन का मन से समर्थन करेगा?... उसके खिलाफ क़ानून बनाने में पुरजोर कोशिश करेगा?.. हाँ, मजबूरी में एक्टिंग जरूर कर ले...
    किन्तु न शराब पीना छोड़ेगा और न ही उसका विरोध पसंद करेगा...
    हमें दशहरे पर रावण के पुतले जलाने की आदत पड़ गयी है मतलब बिना रक्त की क्रान्ति की ... किन्तु आज़ ऐसा माद्दा नहीं रहा कि नवीन रावणों का वध कर पायें... देव 'राम' के प्रयासों से घृणा और राव 'किसन' जैसे अगुआ के हठयोग की सराहना.

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  9. अन्ना की इस लड़ाई में जमघट लगने के एकाधिक कारण थे....

    दूसरी बात,
    जब प्राण-सुरक्षित गारंटी वाली क्रान्ति होती है तब तो बिल से वो चूहे भी बाहर आ जाते हैं जो कम्युनिस्ट विचारों के होते हैं मतलब अवसरवादी होते हैं. [वर्तमान में कम्युनिस्ट का अर्थ अवसरवादी के अधिक करीब है.]

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  10. .हम अन्ना जी को शत-शत नमन करते है जिन्होंने हमें हमारे अन्दर छिपी शक्ति से परिचित कराया....

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  11. समाज को एक सार्थक सन्देश देती है आपकी यह कविता. आभार.

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  12. प्रेरक रचना के लिए आपको मेरी बधाई.

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  13. बहुत बढ़िया प्रस्तुति

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  15. सुन्दर, सार्थक प्रेरक रचना के लिए बधाई।

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  16. आधी जीत , अधूरे सपने
    रहे अधूरे अगर थके तुम ...

    Very inspiring and motivating creation...

    .

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  17. बहुत प्रेरक और प्रभावी प्रस्तुति..बहुत सुन्दर

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  18. आधी जीत , अधूरे सपने
    रहे अधूरे अगर थके तुम ...

    बहुत ही अच्‍छी रचना ।

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  19. yahi to chaahiye, ki yuva varg jaage...
    युवा खड़ा है
    समझ रहे हो ....
    तनी मुट्ठियों की परिभाषा

    prerak rachna, shubhkaamnaayen.

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  20. बहुत उम्दा प्रेरक रचना....

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  21. झंडे लेकर चलते रहना
    रुके न अब जो बढे कदम
    जाने विश्व ,
    परख ले दुनियां
    बिना रक्त के संभव क्रांति
    भारतवर्ष अग्रणी हरदम
    जन आन्दोलन,
    अद्भुत शांति.
    bahut khoob
    rachana

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  22. सत्य के मार्ग पर निर्बाध गति से चलने हेतु ऐसे ही प्रेरक गीत अनिवार्य होंगे.सार्थक व प्रेरक रचना.

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  23. ऐसे मौक़ों पर यह गीत मुझे बहुत याद आता है ...
    हम लाए हैं तूफ़ान से क़िश्ती निकाल कर कर ..
    अब तो क़श्ती को आगे ले जाने का भार युवा कंधों पर है।

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  24. आधी जीत , अधूरे सपने
    रहे अधूरे अगर थके तुम .. ........ बहुत बढ़िया प्रस्तुति

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आपके आने का धन्यवाद.आपके बेबाक उदगार कलम को शक्ति प्रदान करेंगे.
-कुश्वंश

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