26 अगस्त 2011

बात नहीं अब रण होगा...





मुझे नहीं लगता 
तुम जीवित बचोगे   
तुम्हे  बचाने के प्रयास 
हमने तो बहुत किये
लेकिन तुम्हारा दुर्भाग्य
तुम रार ऐसों से ठान बैठे
जिन्हें नहीं मालूम
एक जान की कीमत
और मालूम भी हो तो
अपनी जान नहीं बचायेंगे क्या ?
उन्हें तो सिर्फ चुनाव की भाषा आती है
आओ लड़ लो.
ठोकने लगे है ताल
और वो तुम्हारे साथ खड़े लोग
प्रजातान्त्रिक खेल के दिन
किसी मजबूरी का रोना रोकर
घर में दुबके रहेंगे
एक बार फिर
चौथाई प्रतिशत वोट लेकर वो    
संसद जा घुसेंगे 
कानून बनायेंगे 
देश चलाएंगे , लूट खायेंगे
पहले कर देंगे अपाहिज
फिर पोलिओ ड्रॉप पिलायेंगे 
तुम सत्तर सालों में भी रहे वहीं के वहीं
उनके चार सालों का कोई नहीं  हिसाब
जिसे जोड़ सको तुम
तुमने क्यों कह दिया
सर कटा सकते है
ये काट लेंगे और कहेंगे मान ली तुम्हारी बात 
तुम पीते रहो घूँट-घूँट पानी 
हम मीटिंगें करते रहें तुम्हे मनाने की
खाते रहें काजू बादाम 
करते रहें राजनीति , 
फेंकते रहे गोटिया
सेंकते रहे हमारी ही आंच में अपनी रोटियां 
लेकिन अब और नहीं होगा 
साठ सालों से जो जिया 
अब नहीं जियेंगे 
पहले राजा , फिर अंग्रेज अब नेता 
कोई और गद्दी नहीं
अब  उत्तर और  प्रतुत्तर होगा
तुम बहुत कर चुके प्रयोग
अब हमारी बारी है 
तुमको सबक सिखाने की पूरी तैयारी है
अब बात नहीं
ना ही कोई अनशन 
जाग चुके है बहुत देर से 
अब तो बस जागरण होगा
ढूंढो छिपने की जगह पापियो
बात नहीं 
अब रण होगा.
अब तो बस रण होगा.


-कुश्वंश 


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