25 अगस्त 2011

भारत माँ की लाज बचाओ



देश प्रेम की आयी आँधी,
अलख जगाई, आशा बांधी.

भ्रष्ट लुटेरों का समाज,
जनहित गया गर्त में आज.

बेचा देश , बेंच दी धरती,
माँ पर फिर, बेड़ियाँ जकड दी.


देश खोखला , पेट है खाली,  
कुर्ता खादी लगते गाली.  

कैसे कठिन मिली आज़ादी,
आज हो गयी बिलकुल आधी.

अंग्रेजों से जिसे बचाया ,
अपनों ने कर दिया सफाया.

मिल बैठे मौसेरे भाई,
सबने अपनी जात बताई .

खुली लूट, डर, रहा कोई ना, 
व्यर्थ गया सब खून पसीना.

जागो, उठो,  हुंकार भरो ,
हथियारों में धार धरो.

अहिंसा रहे मात्र हथियार,
भ्रस्ट फनों  पर करना वार.

देखो अब, संकोच न करना ,
अपनों पर,  ना,  वार से डरना.

धर्म युद्ध है अपने  घर  में,
कृष्ण खड़े है पुनः समर में.

निश्चित जीत धर्म की होगी,
फिर  आज़ादी,  घर  आयेगी.

निकलो , उठो,  मुट्ठियाँ बांधो ,
जो भी सोये ,उन्हें  जगा दो.

बेड़ियों से फिर मुक्त कराओ
भारत माँ की लाज बचाओ,

- कुश्वंश



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