23 अगस्त 2011

दूसरी आज़ादी की खुशबू


सुबह  हुई
भैया ने घंटी बजाई
डिब्बे में गाढा गाढा दूध दिखाई देता है
बूँद भर भी पानी नहीं
भैया और मैं एक दुसरे को कनखियों से देखते है
और मुस्कुराते है
कूकिंग गैस वाला सिलेंडर तौल कर दिखाता है
सब्जी वाला ठेला ताजगी भरा है
बाबूजी आज एक भी सब्जी रंगी नहीं है
धनिया भी नहीं
बिजलीघर में मीटर खराब आवेदन की लाइन लम्बी है
बाबू एक दो पैसे की रेजगारी भी वापस दे रहा है
होने का बहाना नहीं बना रहा
ऑटो वाले तीसरी सवारी से ना बैठने की विनती कर रहे हैं
कोर्ट में केश की सुनवाई आज पूरी होगी
कोई तारिख नहीं बढ़ेगी
 ठेकेदार का बिल बिना कमीशन पास हो गया
सरकारी इमारत 4-1 के मसाले से बनी
इन्ज़ीनियर साहब को भरोसा हो गया
सरकारी दफ्तर समय से, खुले ही नहीं
अफ़सरो ने मन से काम भी किया
रेल मे सीटे नहीं बिकी प्रतीक्छारत को मिली
बैंक में बिना कमीशन  पास हुआ लोंन
रेलवे क्रासिन्ग पर लोग अपनी लेन मे चले
नही लगा रहा कही कोई  जाम , दिन भर
पुलिसवाले नो एंट्री ट्रक के पीछे
दस बीस रुपयों को नहीं दौड़े
ट्रक को थानें पकड़ ले गए
किसी महिला की चेन नही लुटी
देश में दहेज़ हत्या , ना लूट के लिये खून, , न ही कोई बलात्कार
थाने में ऊंघती रही पुलिस
अस्पतालो सग खुली पथोलोजी रही सूनी
बिना  जरूरत कोई खून जांच नहीं हुयी 
डाक्टर ने बिना जांच मर्ज़ पकडा
नर्सिंग   होम नहीं भेजा भरती होने  
रिक्सेवाला भरपेट खाकर सोया
रिसर्व बैन्क मे बेनामी विदेशी धन से ओवेर्फ़्लो हो गया खजाना
कालाधन स्वेक्छा से बाहर आ गया और जमा हो गया सरकारी खजाने मे
तिरन्गा लालकिले पर और ऊन्चा लहराया
राजनीति  को सांप सूंघ गया
भ्रष्टाचार की चूले हिल गयी
सदाचार की बांछे खिल गयी
अन्ना  चले गये गाव
दूसरी आज़ादी की खुशबू
फैलने लगी थी चारो तरफ
गूंजने लगे थे नगमे
ये देश है मेरा 
स्वदेश है मेरा
गांधी को मिल गया था  सच्ची अर्थों में वारिस
विश्व ने जान लिया  था
गांधी.. कहाँ  बार-बार लेते है जन्म
कहाँ है  सच्चा प्रजातंत्र .


-कुश्वंश

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