5 अगस्त 2011

प्रयास जरूरी है

कैसे होता है
कोई हृदय संवेदनहीन 
कैसे पड़ जाती  है खरोंचे  
रक्त के रिसने की हद तक
और हम पहुच  जाते है 
प्रागैतिहासिक युग में
आधुनिक युग के   हथियारों के साथ
और चाक कर देते हैं
हृदायिक संवेदनाओं के निलय
रिश्तों के  अर्थ
होने लगते है  बेमानी
निकृष्टतम   शब्दों की
खुल जाती है 
दुर्गन्धयुक्त पोटली
और कर देते है हम परिवेश को
दूषित-प्रदूषित
चीत्कार करने लगती है 
संस्कारों की  हमारी संस्कृति
क्यों नहीं समझ पाते
कुलीन होने का अर्थ 
सभ्य-अशभ्य का मर्म
शिक्षा कितनी और कैसी होनी चाहिए
उठने लगते है प्रश्न
साहित्य के आयाम क्या होने चाहिए 
और कैसे 
संस्कारित होने के लिए जरूरी है  साहित्य 
हर गली कूचे में 
नहीं हो सकते खाकी....
मगर हर घर में 
साहित्य हो सकता है 
अच्छे बुरे सोच को
बेहतर तरीके से समझाने वाली
पुस्तके हो सकती है 
और हो सकते है 
गीली मिट्टी को आकार देने वाले
शिक्षित ,संस्कारित  परिजन
तभी...  शायद...
गली कूचे को  प्रदूषित करते शब्द
कुरुक्षेत्र  की ध्वनियों  की तरह
नेपथ्य में खो जाये ..
क्या ये प्रयास   जरूरी नहीं  ?

- कुश्वंश

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