15 जुलाई 2011

भीचो मुट्ठी

फिर बिखर गए
शरीर में कल तक जो जुड़े थे
हमारे टुकड़े
तुमने बेटा खोया
खोया ....
तुमने पति खोया
खोया ...
हम बटोरते रहे सड़क पर बिखरे
हाँथ, पैर, उँगलियाँ, नाखून
खून सने चेहरे
वो टटोलते रहे बाहरी हाँथ
नहीं मिलीं अपनी कोई गलतियाँ
गलतियाँ तो तुम्हारी है
तुम वहां गए ही क्यों
वार्निंग तो दी थी
घुसे है आतंकवादी कई शहरों में वारदात को
कैमरे बनाते रहे एक्स्क्लुसिव्व रिपोर्ट
पहले मैंने-पहले मैंने
फैलाते रहे सनसनी
रोते रहे घडियाली आंसू
साल भर में दो ही तो हुए
पाकिस्तान में तो रोज ही होते है
उन्हें कौन समझाए अमेरिका में फिर नहीं हुआ
एक बार हुआ तो घुस कर मारा
हम होगये नपुंशक
घुस आये को भी नहीं मार पाए सालों तक
वो जो रोज दिखता है पड़ोस में
हमें बताते रहे पुरानी है फोटो सालों पहले की
एक बात और ...
हम करोड़ों में है
हजारों है हमारे शहर
सब जगह नहीं रोक सकते बम.. खून
मजबूरी है बहाने दो
सोचो जिन से बाँध राखी थी उम्मीद
वो हमारे पीछे छिप गए
अब स्वयं भीचो मुट्ठी
करो संकलित प्रहार
बिना किसी सहायता की उम्मीद के
करो अमेरिका सा दिल, दिमाग और ज़ज्बा
तभी बचा सकते शरीर के कटते टुकड़े
समेट सकते हो उन्हें
जो बिखर गए सड़कों पर
लावारिस.


-कुश्वंश

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