4 जून 2011

फस गए बाबा ...

मैंने कहा था,
मदारियों के बीच का खेल
तुम्हे नहीं आता,
फस जाओगे,
पहले तो आगे-पीछे नाचेंगे,
समझेंगे तुम्हारा नांच,
फिर तुम्हे ही नचाएंगे,  
नही आती है तुम्हे कलाबाजी,
तो क्यों तम्बू गाडा ? 
गाडा ही था,
तो क्यों मदारियों के पास गए
सर्कस समझने ,
तुम ठहरे
अध्यात्मिक गुरु
योग से विकारों को दूर करना
तुम्हे बखूबी आता है,  
दाव-पेच तुमने कहाँ सीख  पाए होंगे,
राजनयिकों सी अगवानी से
कितने गदगद हुए थे तुम,
तुम्हे गदगद देखकर
वे तुम्हारी जटाओं में घुस गए,  
तुम नहीं देख पाए  
तुम्हारी जटाओं में उलझकर  
कोई ले रहा था भेद,
तुम आँखे मूंदे योग में मगन थे ,
तुम्हे क्या लगा था ?
तुमने जिसे  दीक्षा दी थी
उसे याद होगी,
अनुलोम -विलोम कितना भी सिखाओ,
ये विलोम  ही  जानते  है,
अनुलोम सिर्फ मौके पे अपनाते है,
सदियों से जिस पर
कुंडली मारे बैठे हों
कई सांप , 
उसे क्यों छूने  की हिम्मत की  तुमने,
की भी  तो ,
कैसे बच सकते हो फुंफकार  से , 
इतना आसान  समझा था
साप की केचुल निकलना,
अन्ना राजनीतिज्ञ नहीं,
लेकिन सानिध्य में रहे हैं,
जानते है ,
कैसे करवट लेता है सांप ,
तुम्हे आगाह किया था,
तुम नहीं समझे,
तुमने सच को
चाहे जितना सच कहा हो
बना दिए गए  झूठ,
और तौल दिया तुम्हे
जंग लगी तराजू में,
जिसमे तौलते आये  है
न जाने किस-किस को,  
एक आन्दोलन
उलझ गया वादों में,
दूसरा
छिपे हुए इरादों में,  
तुम उठ खड़े हुए
तुम्हे उठने दिया ,
तुम इतना उठ गए
जहा से वापस आने का कोई रास्ता नहीं था,
तुम्हे सहारा देकर टांग दिया हवा में,  
ताकि तुम टंगे रहो वहीं
और खाते रहो कलाबाजियां
अब न कोई अन्ना,
न कोई बाबा,
किसी कृष्ण को आना होगा,
इस अधर्म के कुरछेत्र में,
धनुर्धर अर्जुन को तुम्हें
फिर विराट रूप दिखाना होगा,
अंधे धृतरास्त्र  को निर् वंश    कर
एक बार फिर
महाभारत रचाना होगा
कृष्ण तुम्हे एक बार फिर
आना होगा .

- कुश्वंश
  




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