5 मई 2011

जिन्दगी












तेज रफ़्तार
जेट युग में
जब भी दौडती है जिन्दगी
तो कही छूट जाते है 
इंसानी रिश्ते
उन्हें जरूरत होती है 
सीचने की
फूलों  की खुशबू,  
खो जाने से पहले 
वापस महसूस करने की  
और इन्ही इंसानी रिश्तों को 
देनी होती है गर्माहट
जीवन की आपाधापी में  
फर्ज को निभाते-निभाते  
धुंधले हो जाते है  
कुछ बेहद करीबी फर्ज  
उन्ही को  बेहद करीब से याद करने को  
होती  है होलीडे यात्रायें
और उन यात्रयो के बाद 
और तरोताजा होकर 
रिश्तों की गर्माहट महसूस करते 
एक नए जोश से  
लौट आती है  जिन्दगी  
तेज रफ़्तार दौड़ने के लिए
जो जिन्दगी की नियति है 
ऐसे ही
रूबरू कराती है 
रोज़ नए आयाम
तेज रफ़्तार जिन्दगी 

- कुश्वंश


( हमारे रचना संसार के सहृदयी साथियो को
अभिवादन , शीघ्र ही अपने सुधि साथियों के ब्लॉग पर एक एक कर आऊंगा
और अपनी उपस्थिति दर्ज करूँगा- पुनः अभिवादन - कुश्वंश )

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