27 मार्च 2011

उत्तर मिले तो बताना ?

हमने, आपने, सबने 
पहन रखे है मुखौटे
तरह तरह के
कोई कनखियों से देखता है और
करता है असम्मान
और कोई दूर तक
करता है पीछा
जब तक वो उसे दिखाई देती है
सड़क पर उसपर छोड़ देता है हाथ
बिना समझे
बिना जाने
क्यों पीट रही है उसे भीड़
रिश्वत लेने वालों ने खोल रखी पाठशालाएं
संस्कारित समाज बनाने की
स्त्री को सबला बनाने के होड़ मैं
किसने कितनी
सरकारी  दया  डकारी
हमने कोशिश भी नहीं की जानने की 
किस सास ने
लडकी जन्मने के नहीं दिए ताने 
शिक्षित होकर भी    
अपनी ही परछाई पर 
क्यों नहीं हो पाई खुश 
कहा गए शिक्षा के सारे आंकड़े 
जमीन पर नहीं उतरे शायद 
आसमान पर  हो गए है तारे
आक्ड़ेबाजों को गिनने में आशानी हो  
शायद इसीलिये  
आजादी के  सत्तर सालों में  भी 
अगर अबला कैसे हो  सबला 
की सिर्फ बहस हो 
तो हम आज़ादी के पहले ही अच्छे थे
तब बेड़ियों में जकड़े हुए भी  
कितने सच्चे थे
हमारे आसपास तो  नहीं थे 
कमसे कम
कोई आंकड़े 
आज तो जिन्दगी ही उलझ गयी है
सिर्फ आंकड़ों मैं
कुछ सरकारी 
कुछ गैर सरकारी   
महगाई के कम होते आकंडे
आर्थिक देश के बढ़ते आकडे
महिलाओं के साथ अपराध के  भी
कम होते आंकड़े
पिछले साल से ५० कम हुए बलात्कार
कम हो रही है
दहेज़ हत्याएं   
मुस्कुराओ के कम हो रहे हैं आंकड़े 
यदि मुस्कुरा न सको तो
पहन लो मुखौटा
और शामिल हो जाओ 
देश की उतरोत्तर प्रगति में
खादी वालों के साथ  
में उठा रहा  हूँ  एक प्रश्न 
उत्तर मिले तो मुझे भी बताना ..

-कुश्वंश
  

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