23 मार्च 2011

ये रिटायर लेन है














साँझ के झुरमुट में
ऊपर पोर्च के कोने में
खड़ा था में 
गली में आ जा रहे थे लोग
नीचे खेल रहे थे कुत्ते   
काट कर भी नहीं काट रहे थे  एक दुसरे को   
यहाँ से वहां
भाग कर जाते
किसी  को दूर तक खदेर आते
बच्चे  चला रहे थे सायकिल
कुछ बच्चों के  पीछे
उनके रिटायर  दादा जी दौड़ रहे थे  
वो दूर  देखो 
कैसे प्रेम रश में मगन हैं  जोड़े
इससे अनजान की कोई देख रहा है 
पश्चिम से  
ढेर सारे कौवे 
पास के पीपल पर आ बैठे थे   
चाट वाला गंदे से ठेले पर  
बेच रहा था चाट  
डुबो देता था  पानी में  गंदे हाथ 
गोलगप्पे खिलाने के लिए 
सामने दादी ने 
अपने ही लान में फ़ेंक दिया था कूड़ा 
ऊपर से  नीचे 
बड़ी बहू के छज्जे पर  
छोटी  बहू ऊपर से हंस रही थी
वो टाई वाले अंकल 
सब्जी लेने जा रहे थे  
रिटायर आईएस  थे  
टाई कहा उतरती 
पड़ोस वाली आंटी 
बैठी थी अकेली  
तीन महीने पहले 
कर गए थे अंकल, अकेला, अचानक 
हॉस्पिटल की लापरवाही से  गलत दवा,
ऊपर से ओवर डोज़ 
सामने स्कूल में  
हास्टल से झांक रहे थे बच्चे
लड़कियों वाले  पंडित जी  
रायफल लेकर टहल रहे थे  
दूधवाला 
सामने ही   नाप रहा था  पानी
माताजी कह रही थी 
अच्छा दूध दिया करो 
भईया मुस्कुराकर चल देता है  
वो रिटायर चांसलर  
अपने  मानसिक असंतुलित बेटे को
ईवनिंग वाल्क करा रहे थे  
ब्रद्ध  पत्नी के साथ पकड़कर  
कह रहे थे
मेरे बाद इसका क्या होगा
ये रिटायर लेन है  
सभी के  है  दो-दो लड़के -लड़कियां 
कोई देश में ही कोशों दूर  
कोई सात समुन्दर पार 
जीवन के इस अंतिम सोपान में  
साथ-साथ रहने को थे
दो प्राणी 
सुख-दुख में  साथ निभाते 
त्योहारों पर भी
अश्रुपूरित आँखों से
परम्पराएँ निभाते
यही नियति है  और
यही  है  सिमटते,बिखरते परिवारों का अर्थ 
बाल-बच्चो के  होने पर भी 
कैसे होते हैं  
दंपत्ति बाँझ 
शायद ऐसे ही  
...शायद ऐसे ही ....?

- कुश्वंश  

  (चित्र गूगल से साभार)


हिंदी में