15 मार्च 2011

बौरायी होली













तुम मनाओ
होली

हम तुम्हारे
स्पर्श के रंग
सपनो में भरेंगे , 
बनायेंगे इन्द्रधनुष
सतरंगी रंगों के, 
संजोयेगे दूर तक
अंतर-आकाश,    
बूंद-बूंद
भीगेगा मन , 
पोर-पोर
सिहरेगा तन,
बरसेगा हवाओं में

स्नेह का गुलाल,
पीली  नारंगी 
मखमल  सी धूप
फिजाओं में बिखरेगा
रेशम सा रूप 
ऐसे ही बरसेगी
फगुनाई बोली
आयेगी योवन सी
बौरायी होली

-कुश्वंश



 


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