23 फ़रवरी 2011

कौन सा जीवन याद करूँ......










कहो आज मैं
कैसा जीवन याद करूँ,
किससे अपने
मन मंदिर की बात करूँ,
कौन है वो,  जो
समझेगा बातें मेरी,
कौन है जो
कर दे उजली, राते मेरी,
और जान ले
कुछ अपने भीगे सपने,
बचपन से जो शुरू  हुए
टुकड़े अपने, 
दहलीज किशोरी पार हुयी 
खलिहानों  में,
रंग जवानी,
तार  हुयी, दुकानों में, 
मिला एकदिन
मुठ्ठी में
सारा आकाश ,
आँचल  में भर लिया 
प्यार ,
उजला प्रकाश, 
फिर न जाने छोड़ मुझे
वो गया कहाँ,
कैसे जानू
कब बैरी हो गया जहाँ,
शब्द वाण तरकश से खाली  हुए,
चले,
कैसे-कैसे, संबोधन
हर बार मिले,
क्या मुझको
ऐसे ही  जीवन जीना था,
आँखों में आँशु भरे
जहर बस पीना था,
क्या मेरे दुःख का 
हिशाब-किताब
कही होगा,
क्या मेरे हिस्से का 
आफताब कही होगा,
गर नहीं तो कहो,
कहाँ  किससे, फरियाद करूँ
और बताओ
कौन सा जीवन याद करूँ......

-कुश्वंश






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