8 फ़रवरी 2011

अंतर आकाश

जाने कितने पंछी उड़ते
इस  अंतर आकाश में,
कुछ काले
कुछ नीले-पीले,
कुछ जीने की आस में,
मर मर के कुछ हुए दीवाने,
कुछ  जीते परिहास में, 
कुछ उनकी चर्चा बन बैठे,
कुछ पहुचे इतिहास में,
मुझे नहीं यू, घुट कर जीना
अश्रु नहीं है, मुझको पीना,
मुझे बदलना है भूगोल,
घुटे,  शब्द-अर्थो के मोल,
मै आऊंगा,  
अंतर से बाहर आऊंगा,
स्याह  क्षितिज में,
रंग प्यार के  बिखराऊंगा,
तुम  चाहो तो उन रंगों में
मुझे देखना,
मुझे चाहना .....

-कुश्वंश


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