8 अप्रैल 2012

दिल ही दिल

रास्ते जैसे भी  थे ,  
संगीन थे
दोस्त जितने भी मिले
रंगीन थे
कुछ न कुछ तो था मगर
जाने न तुम
कनखियों की राह
पहचाने न तुम
रास्ते में जो मिले
ग़मगीन थे
जो भी मिले  संगी सभी
नमकीन थे 
पड़ोसी जितने मिले 
तमाशबीन थे 
क्या करे
पूंछे दिल का हाल
किससे
दिल ही दिल में सब
दिलों से हीन थे 

-कुश्वंश


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