12 जनवरी 2012

रच दे प्यार तमाम














तुम हो
मैं हूँ
और हंसीं उन्मादी शाम
आओ रच दे प्यार तमाम,
अधरों को
अधरों की आशा,
नयनों में
स्वप्निल परिभाषा,
योवन न होए निष्काम
आओ रच दे प्यार तमाम,
मन की तृस्ना
बंधन आशा,
मौन समर्पण
की अभिलाषा,
स्पर्शों का
विस्तृत अंजाम
आओ रच दे प्यार तमाम,
रेशम रेशम
केश घटायें,
चन्दन चन्दन
मधुर हवाएं,
आयी फिर उन्मादी शाम
आओ रच दे प्यार तमाम.

-कुश्वंश

28 टिप्‍पणियां:

  1. ये भी जरूरी है ...आप की इच्छा पूर्ण हो |
    शुभकामनाएँ |

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति

    शुक्रवारीय चर्चा मंच पर

    charchamanch.blogspot.com

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  3. वाह..
    बड़ी मधुर रचना है...प्यार की रचना..

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  4. खूबसूरत और कोमल एहसास ...

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  5. कोमल भावों से सजी सुंदर रचना ...

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  6. भई वाह ! अभी तक प्रेम गीत गाए जा रहे हैं । :)
    बहुत सुन्दर ।

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  7. बेहतरीन ...दाद कबूल करें...

    नीरज

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  8. सुन्दर ..बहुत ही सुन्दर...

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  9. बहुत सुन्दर, बधाई.

    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधार कर अपना स्नेहाशीष प्रदान करें, आभारी होऊंगा.

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  10. प्यार के साथ अपने रचना भी बहुत अच्छी रची है....

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  11. उम्दा....गहरे भाव लिए लेखनी ...बहुत खूब

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  12. सुन्दर मनभावन पोस्ट है आपकी |

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  13. दराल साहब , अभी तक का क्या मतलब, प्यार्र तो ता उम्र का अहसास है अब ये अलग बात है की ये किसके लिए है. हमें भी मालूम है आपके ह्रदय की बात...जिंदादिल ह्रदय की बात..

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  14. अधरों को
    अधरों की आशा,
    नयनों में
    स्वप्निल परिभाषा,
    योवन न होए निष्काम

    ....कोमल अहसास लिये बहुत मनभावन रचना...शब्दों और भावों का बहुत प्यारा संयोजन...

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  15. सुंदर शृंगारिक गीत।
    ऐसा लगता है जैसे शब्द बोल रहे हैं।

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  16. रेशम रेशम
    केश घटायें,
    चन्दन चन्दन
    मधुर हवाएं,
    आयी फिर उन्मादी शाम
    आओ रच दे प्यार तमाम.

    बहुत खूब.... शानदार,उम्दा,लाजवाब.....

    मैं आपको मेरे ब्लॉग पर सादर आमन्त्रित करता हैं.....

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  17. बहुत ही सार्थक व सटीक लेखन| मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  18. गजब का शब्द चयन, प्रवाह देखते ही बनता है.

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  19. बहुत सुंदर मनभावन सार्थक रचना, शब्द पवाह अच्छा लगा
    new post--काव्यान्जलि --हमदर्द-

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  20. बहूत हि सुंदर कोमल अह्सासो से युक्त प्यारभरी रचना है

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आपके आने का धन्यवाद.आपके बेबाक उदगार कलम को शक्ति प्रदान करेंगे.
-कुश्वंश

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