12 जनवरी 2012

रच दे प्यार तमाम














तुम हो
मैं हूँ
और हंसीं उन्मादी शाम
आओ रच दे प्यार तमाम,
अधरों को
अधरों की आशा,
नयनों में
स्वप्निल परिभाषा,
योवन न होए निष्काम
आओ रच दे प्यार तमाम,
मन की तृस्ना
बंधन आशा,
मौन समर्पण
की अभिलाषा,
स्पर्शों का
विस्तृत अंजाम
आओ रच दे प्यार तमाम,
रेशम रेशम
केश घटायें,
चन्दन चन्दन
मधुर हवाएं,
आयी फिर उन्मादी शाम
आओ रच दे प्यार तमाम.

-कुश्वंश

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