15 अक्तूबर 2010

जीवन को घूट घूट पीने दो

छूने दो 
होंठो को,
गालो को,
बालो को.
खुलने दो
मन के
रचे बसे 
सतरंगी  तालो को
बंद आँखों के
नीले पीले रंगों को  ?
नीले नीले सपनो को,
गुलाबी-गुलाबी अपनों को.
काले काले मन को,
सफ़ेद सफ़ेद तन को.
कुछ मत करो तुम
बस,
Previewछूने दो
जीने दो
शाम होने को है
जीवन को घूट घूट पीने दो  
रक्त  की तरह
आखिरी बूंद तक

-महेश कुश्वंश-

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